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जयपुर में काम करने वाले स्थानीय कारीगर


जयपुर में अत्यधिक कुशल और स्थानीय कारीगर एक से बढ़कर एक है। उनमें से कुछ हाथ ब्लॉक छपाई में काम करते हैं, टाई और वस्त्र या हस्तनिर्मित कागज उत्पादन डाई, जबकि दूसरों को ठीक आभूषण, लाख की चूड़ियाँ, नीला मिट्टी के बर्तन, जयपुर आसनों और कालीन, संगमरमर की नक्काशी, जूते, आदि हैंडक्राफ्टींग की कला में महारत हासिल की है।

यहां पर जयपुर में लोगो में स्थानीय विरासत और कौशल को बढ़ावा देने के लिए यहां के कारीगरों में कई पीढ़ियों से लोगो का विशवाश हासिल कर रखा है। विरासत में मिला कारीगरी के साथ स्थानीय कारीगरों सालों से एक ही काम को कर रहे है। आप जयपुर की गलियो में घूमकर देखेगे कि स्थानीय कारीगर कैसे रहते है आप इनकी कला को देखेगे तो आपको असली कारीगरों के बारे में पता चलेगा।

जूते के लिए रामगंज बाजार

जयपुर के रामगंज बाजार में आप जयपुर के जुटा निर्माताओ को देख सकते है यहां पर शहर के भीतर रामगंज क्षेत्र में जयपुरी जूते और बूट के जुते देख सकते है। आप यहां पर जायेगे तो आप देखोगे कि किस प्रकार जयपुरी सूंदर जूतियो को तैयार की जाती है।

Jaipur shoes or jootis

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टाई और डाई वस्त्र उद्योग के लिए किशनपोल बाजार

राजस्थान के जयपुर शहर में टाई और डाई कपड़े का काम भन्देज के कपड़ो को तैयार करने के लिए प्रसिद्ध है यहां पर भन्देज के खूबसूरत वस्त्र तैयार किये जाते है। इन वस्त्रो की सूंदर डिजाइन और रंगीन पैटर्न के कारण स्थानीय लोगो और पर्यटको के द्वारा बहुत प्रशंसा की जाती है। यहां पर किशनपोल बाजार में आप कारीगरों के द्वारा भन्देज का कपड़ा कैसे तैयार किया जाता है और कैसे कुशल कारीगरों के द्वारा अलग-अलग डिजाइन में तैयार किया जाता है ये सब आपको वहां पर देखने को मिलेगा।

मनिहारों का रास्ता (त्रिपोलिया बाजार) लाख की चूड़ियाँ और आभूषण के लिए

लाख के आभूषण और लाख की चूड़ियों ने जयपुर में ही जन्म लिया है। जयपुर के स्थानीय कारीगर सूंदर लाख की चूड़ियां, लाख के आभूषण, दर्पण का काम रगीन मोतियों से जड़ी चुडिया बनाते है। लाख की चुडिया बनाने का काम पीढ़ियों से चला आ रहा है प्राचीन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण कला के द्वारा ये काम किया जाता है। जयपुर में लाख की अलग-अलग डिजाइन की चुडिया लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करती है ये अलग-अलग जगहों पर भेजी जाती है और दर्शको के बीच में प्रसिद्ध है। मनिहारो का रास्ता जयपुर में लाख की चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।

making of Jaipur lac bangles'

making of Jaipur lac bangles

अचरोल हाउस, कालीनों के लिए सुभाष चौक

आपको अपने घर के लिए कुछ अलग और अद्वितीय सामान खरीदना है तो आप अचरोल हाउस सुभाष चौक जाना चाहिए। आप यहां पर जयपुर की प्रसिद्ध कालीन और दरिया खरीद सकते है और यह काम स्थानीय कारीगरों के द्वारा हाथ से किया जाता है और खूबसूरत कालीनों को तैयार किया जाता है।

संगमरमर पर नक्काशी के लिए खजाने वालों का रास्ता

खजाने वालों का रास्ता विशेष रूप से संगमरमर मूर्तियों के लिये जाना जाता है। जयपुर की दीवारों और शहर के अंदर आप इस क्षेत्र में अलग-अलग डिजाइन की खूबसूरत मूर्तियों को खरीद सकते है यहां के स्थानीय कारीगरों की संगमरमर की मुर्तिया बनाने के लिए उनके कोशल की प्रशंसा जितनी की जाये उतनी कम है। कलाकार पत्थरो की नक्काशी की कुशलता में विशेषज्ञ हैं  और वो किसी भी आकर के कुछ भी बना सकते है जैसे जादू की तरह उछलते फव्वारे, पक्षियों, सजावटी घर सजावट आइटम, प्रभावशाली रसोई के बर्तन, हाथी, घोड़ों और अन्य कलाकृतियों के रूप में इस तरह के बहुत सारे आइटम तैयार किये जाते है।

ब्लॉक प्रिंटिंग, हस्तनिर्मित कागज और नीले रंग के मिट्टी के बर्तनों के लिए सांगानेर गांव

सांगानेरी गाव में कपड़ो के छोटे-छोटे पर स्थानीय कारीगरों के द्वारा तैयार ब्लॉक प्रिंट की कलात्मक डिजाइन देखने को मिलती है। जयपुर शहर के निवाई गाव और सांगानेरी गाव में आप कारीगरों से मिलने के लिए जाओ वहां पर कारीगरों ने कई वर्षो और पीढ़ियों से अपने कोशल से कपड़ो पर ब्लॉक प्रिंटिंग में महारत हासिल कर रखी है। जयपुर के ब्लू मिट्टी के बर्तन भी एक पुराणी कला है जो पहले सुरु में फारस से आयी थी उसके बाद 15 वीं सदी में ईरान में  पॉलिश किया गया था इससे पहले ये मुगलो के साथ भारत आई थी और अब यह काम केवल जयपुर में ही देखने को मिलता है।   

hand making

 making process of Jaipur blue pottery

बंदूको के लिए मोती डूंगरी रोड पर

नईमुद्दीन मोती डुगरी रोड़ पर जयपुर की प्राचीन बंदूको का कारोबार करता है। यह कारोबार पहले कुतुबुद्दीन के द्वारा शुरू किया गया था और यह इनको 6 पीढ़ियों से विरासत में मिला हुआ है। यह पहले जयगढ़ किले में तोपों और अन्य हथियारों की देखभाल करने के लिए काम करते थे। यह कला इनको पीढ़ियों के माध्यम से मिली हुई है बन्दूको को अलग मॉडल बनाकर परिवर्तन करके तैयार किया जाता है आप यहां पर प्राचीन शैली की बन्दूको को भी देख सकते हो। इन्होंने 1526 ईसवी में तोड़ेदार बन्दूक तैयार की थी।

हाथ ब्लॉक प्रिंट के लिए अनोखी संग्रहालय

आप जयपुर के अनोखी संग्रहालय में जायेगे तो वहां पर आपको हाथ ब्लाक कारीगरी देखने को मिलेगी। उनको कला शैली के बारे में अधिक जानने के लिए आप यहां पर यात्रा कर सकते है। यहां की डिजाइन और अभिनव देखकर आपका मनोरंजन होगा। आप यहां के पैटर्न और डिजाइन से बने सामान को हाथ से कैसे तैयार किया जाता है को अपनी आँखों से देख सकते हो।

जौहरी बाजार

जोहरी बाजार सांगानेरी गेट और बड़ी चोपड़ के बीच में स्थित है यह बाजार घने प्रेमियो के लिए खरीदारी का शानदार विकल्प है। इस बाजार की ख़ास चीजे गले के हार, पेंडेंट, कान के छल्ले, अंगूठियां, कंगन और भी हीरे, पन्ने और घणो को रत्नों जैसे रूबी और पर्ल के साथ भी सजाया जाता है। यह बाजार उत्तम कुंदनकारी और मीनाकारी के गहने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां पर आपको बंधेज साड़ी और लहंगे बहुत ही सूंदर मिलेंगे जिन्हें देख कर आप बहुत ही खुश हो जाओगे।

johari bazar

handcrafted jewellery making in Jaipur

हवा महल हथियार पैनापन

हवा महल के पास एक परिवार 4 पीढ़ियों से यह काम कर रहा है यहां पर तलवारें, खंजर और अन्य हथियारों को पैना किया जाता है। लाल सिंह चौहान ने इस काम को शुरू किया था और अब उनका ये काम गौरव सिंह कर रहा है जो चौथी पीढ़ी के अंदर आता है। ये यहां पर हथियारों की मरम्मत करते है हथियारों को पैना करते है और प्राचीन काल के हथियारों को पॉलिश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इनमे कवच तलवारें, खंजर, कटार, शीथ और मुठ शामिल थे। आज ऐसे कारीगर नही है जो इस काम को कर सकें।

संगीत वाद्ययंत्र के लिए ठाकुर पचेर का रास्ता

संगीत उपकरण की एक प्रसिद्ध दुकान ठाकुर पचेर वालो के रास्ता में है जहां पर सगीत उपकरण मिलते है। एक स्थानीय कारीगर सोहनलाल जांगिड़ नामक यहां पर सगींत के विभिन्न उपकरणों की मरम्मत करने का काम करता है। यह काम पहले इनके पिता के द्वारा शुरू किया गया था यह व्यवसाय इनको 1954 ईसवी में विरासत में मिला है इन्होंने सगीत वाद्ययंत्रो की अलग-अलग किस्मो और हार्मोनियन को ठीक करने में महारत हासिल की है। इसके अलावा जयपुर में सगीत वाद्ययंत्रो को ठीक करने वाले 5 -7 परिवार और भी है।

 

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