MENU X
जीन माता मंदिर - धार्मिक महत्व की एक जगह


जयपुर शहर से लगभग 110 किलोमीटर दूर जीन माता का मंदिर है लोगो के दिल में स्थान रखने वाली धार्मिक माता का मंदिर है यहां पर धार्मिक आत्माओ का वास होता है । यह धार्मिक स्थल भी पर्यटको के यात्रा करने के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है । यहां पर काफी लोग धूमने के लिए और माता के दर्शन करने के लिए आते है ।

जीन माता मंदिर का स्थान

रेवासा पहाड़ियों के बीच सीकर जिले में स्थित जीन माता मंदिर शक्ति की देवी का एक मंदिर के रूप में देखा जाता है।

इसकी उत्पत्ति उम्र की तारीख

इस मंदिर के बारे में धरना है कि यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जा रहा है । जीन माता मंदिर धार्मिक निवास का प्रतीक है । यह तीर्थ स्थान तिर्थयात्रियों के अच्छी धूमने की जगह है । यह मंदिर सुडौल अरावली पहाड़ियों के ऊपर बना है । यहां पर आने से प्रकृति की अति सुंदरता देखने को मिलती है और आप को इस सुंदरता का अनुभव होता है ।

जीन माता मंदिर प्रकृति से घिरा है

जीन माता मंदिर अपने चारो और से ऊँची बढ़ती पहाड़ियों से घिरा हुआ है । जब मानसून का मौसम होता है तो यहाँ भारी बारिश होती है तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता अति सूंदर चित्रात्मक तस्वीर को उपस्थित करती है । यहां पर रसीली जड़ी ब्यूटिया सूंदर झरिया हरे भरे पेड़ पौधे है इनकी सुंदरता के कारण यहां पर शानदार वातावरण देखने को मिलता है । जीन माता मंदिर घने जंगल में चारो और से घिरा हुआ है मंदिर तीन पहाड़ियों पर एक्के बिच में एक केंद्र बिंदु पर बना हुआ है ।

उत्तम समय यात्रा करने के लिए

कहा जाता है कि जीन माता मंदिर का डोरा करने के लिए सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम होता है । आप अपने प्रियजन के साथ सप्ताह के अंत में यहां पर घूमने के लिए आये और यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धर्म और अध्यात्म का अनुभव भी कर सकते हो ।

नवरात्रि के दिनों में: जीन माता मंदिर में असँख्य भक्तो का मेला

नवरात्रि पर्व के दौरान जो लोग नया काम शुरू करते है नई जगह निवेश करते है वो यहां पर नवरात्रि के दौरान आते है जीन माता मंदिर में 9 दिन तक धार्मिक यात्रियों की एक अनगिनत संख्या देखने को मिलती है ।

पारंपरिक कथा और कहानिया

पारंपरिक कथाओं के अनुसार मुगल राजा औरंगजेब ने जीन माता मंदिर और भगवान भैरव मंदिर के टुकड़े करने के लिए और नीचे लेन के लिए अपने सेनिको को आदेश दिया था ।

जब आसपास लोगो को औरंगजेब की इस विनाशकारी इरादे की सचाई का पता चली तो उनके ह्रदय पर गहरी चोट लगी थी । मुगल बादशाह के इस व्यवहार को देखकर लोगो ने देवी जीन माता से प्रार्थना करना शुरू कर दिया था । जीन माता का जादू चला और मधुमखियो का एक गुच्छे ने मुगल सेना के सेनिको पर हमला कर दिया था । मधुमक्खियों के हमले के बाद मुगल सैनिकों अपने जीवन को बचाने के लिए लड़ाई का मैदान छोड़ कर चले गए ।

जीन माता और उसके प्रारंभिक जीवन की कहानिया

अगर आप को कहानियो में विश्वास है तो  कहा जाता है कि जीन माता का जन्म चौहान कबीले के एक राजपूत परिवार में हुआ था । कहा जाता है की उनका असली नाम जयंती माता था ।

दुर्गा माता का अवतार

जीन माता को शक्ति का प्रतिक माना जाता है जीन माता को देखकर लगता है कि वो दुर्गा माता का अवतार है

जीन माता मंदिर में आकर्षण का केंद्र

जीन माता मंदिर में आकर्षण का केंद्र एक शिवलिंग है इस शिवलिंग पर संगेमरमर की बाहर खुदी हुई भगवान नंदी की प्रतिमा है

 


You May Also Like

Two Pali youths have been awarded the Bharat Gaurav Award in the UK Parliament House of Commons. The coincidence is that both are from the Sooz subdivision.

A teenaged girl has been alleged for having killed her husband, who tried to snatch her prized laptop.

The 8 day long 16 Film Festival started at Golcha Cinema, Jaipur this Sunday. On the first day of the festival, film producer Prakash Patel

World’s largest ‘charkha’ is to be displayed at Terminal 3 of the Indira Gandhi International (IGI) Airport in capital city Delhi.

Touristy cities not thrilling enough, bikers head to Rajasthan’s spooky places