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गोविंद देवजी मंदिर


यह मंदिर महाराज सवाई प्रताप सिंह द्वितीय ने वर्ष 1735 में बनवाया था । यह मन्दिर वास्तव में बहुत ही सुन्दर है इस मंदिर की सुनहरी छत है और इस मंदिर में महाराज के प्रिय भगवान विराजते है महाराज इस मंदिर को प्रत्यक्ष रूप से चंद्र महल से देख सकते थे ।

इस मन्दिर में भगवन श्री कृष्ण की आठ मूर्तियां स्थापित की गई है । भगवन श्री कृष्ण ने आठ अवतार लिए थे । यह माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति उनका असली रूप लग रही है जो अवतार के रूप में अवतरित हुआ था ।

चैतन्य महाप्रभु भगवान श्री कृष्ण के सबसे बड़े भक्त थे । उन्होंने उसी स्थान पर छोटी सी कुटिया इस मूर्ति को स्थापित किया। इसके बाद रघुनाथ भट्ट गोस्वामी ने गोविंदजी की सेवा पूजा संभाली, उन्हीं के समय में आमेर नरेश मानसिंह ने गोविंदजी का भव्य मंदिर बनवाया। इस मंदिर में गोविंद जी 80 साल विराजे। औरंगजेब के शासनकाल में ब्रज पर हुए हमले के समय गोविंदजी को उनके भक्त जयपुर ले गए, तब से गोविंदजी जयपुर के राजकीय (महल) मंदिर में विराजमान हैं।

मंदिर के पीछे की कहानी क्या है ?

मुस्लिम शासक औरंगजेब हिंदू प्रथाओं के खिलाफ था। कई हिंदू मंदिरों को नष्ट किया गया और भगवान की मूर्तियां को क्षतिग्रस्त किया गया था । तब प्रभु उनके सपने में आये और उनको निर्देश दिया उन्होंने महाराज को खा कि मूर्ति आप के महल के सूर्य महल में स्थापित करवाया वहा पर वो मूर्ति सुरक्षित रहेगी । जयपुर के महाराज जय सिंह द्वितीय के सपने में प्रभु आये और उन्होंने ये निर्देश दिए कि मूर्ति सूर्य महल में स्थापित करो । तब वहा पर गोविन्द देवी जी की मूर्ति लाई गई थी । इस समय धर्मिक कट्टरता अपने उच्चतम स्तर पर थी । 

इसका किसी पौराणिक कहानी से रिश्ता है

एक समय की बात है कहते है कि भगवान श्री कृष्ण के परपोते अपने हाथो से गोविन्द देवी जी की मूर्ति लाये थे । मूर्ति उनकी दादी द्वारा अपने प्रभु के शरीर और चेहरे के बताये हुए विवरण के अनुसार बनाई गई थी। बज्रनाभ केवल 13 साल के थे जब यह मूर्ति बनाई गई थी । मूर्ति में इस लड़के ने दो बार नक्कासी करने की कोशिश की पर दादी प्रभु ने मतभेद कर मूर्ति को ख़ारिज कर दिया । अंत में बज्रनाभ ने तीसरी बार मूर्ति बनाई वो हूबहू भगवान श्री कृष्ण की तरह लग रही थी और बाद में उसे बज्राकृत किया गया और मूर्ति ब्रज नाम दिया गया । 

गोविंद देवी जी मंदिर देखने से आँखो को एक खुशी मिलती है । और साल भर इसमें पूजा पाठ का माहौल बना रहता है । जन्माष्टमी के दिन भगवान के जन्मदिन के उपलक्ष में मन्दिर को स्वर्ग की तरह सजाया जाता है तो मंदिर ऐसे लगता है जैसे स्वर्ग हो । जन्माष्टमी के उपलक्ष पर बहुत सारे व्यंजन बनाये जाते है भजन होते है नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। इसमें एक और उत्सव होता है जिसको मटकीफोड़ कहा जाता है ।

क्या आप जानते है

  • यह एक बहुत ही प्रतिभाशाली भव्य मंदिर है जो भक्तो को आध्यात्मित भक्ति में डुबो देता है ।
  • 119 फिट की यह दुनिया की सबसे बड़ी आरसीसी छत है ।
  • महात्मा गाँधी की वर्षगांठ के उपलक्ष में जनवरी 2016 में 30 में 000 तेल के लैंप का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया गया था ।
  • सुंदर झाड़ विशेष रूप से यूरोप और कई भारतीय कला चित्रों से प्राप्त किया गया।
  • जयपुर शहर के महाराज सवाई जय सिंह जी सूरज महल में रहते थे और एक दिन उनको एक अजीब सपना आया उन्होंने कि बादल और चन्द्रमा सूरज महल के बिच में स्थित है उन्होंने सोचा कि यह एक सपना है परन्तु यह सपना सच था जहाँ महाराज रहा रहे थे वो प्रभु गोविन्द देवी जी का स्थान था और उन्होंने वह जगह तुरन्त छोड़ दी ।
  • गोविन्द देवी जी की मूर्ति महाराज सवाई जय सिंह जी के अनुरोध पर वृन्दावन मंदिर में स्थापित की गई थी ।

तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बिरला तारामंडल का उद्धघाटन 29 1962 में किया था वो इसके बहुत बड़े भक्त थे । इस तारामंडल का उपयोग विभिन्न उपकरणों और तकनीकों सार्वजनिक सरलतम तरीके से अंतरिक्ष और ग्रहों की जटिल कानूनों को समझ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसी अवधारणा और रणनीति के रूप में इसे बनाया गया है । इस तारामंडल से आकाश से सम्बन्धित सारी जानकारी प्राप्त होती है जिन लोगो को अंतरिक्ष में दिलचस्पी होती है उनके लिए यह बहुत उपयोगी है डिस्कवरी पर विभिन्न ग्रहो की जानकारी हम तारामंडल से ही प्राप्त कर सकते है । यह तारा मंडल खगोल शास्त्रीय एसोसिएशन के साथ जुड़ा हुआ है । आकाश की फोटोग्राफी दूरबीन के माध्यम से खींची जा सकती है । इस तारामंडल के निर्माण के लिए पहले भूमि पश्चिम बंगाल द्वारा पट्टे पर दी गई थी। 

तारामंडल में खगोल विज्ञान के क्षेत्र विभिन्न सेमिनार आयोजित किये गये थे । इसको और अधिक सुविधाजनक बनाने और सौर ग्रहणों सहित विभिन्न खगोलीय घटनाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। अनुसधान के व्याख्यान पर आधारित जानकारी प्राप्त करने के लिए अंतरिक्ष के विभिन्न मुद्दो पर चर्चा आयोजित की जाती है । विशेष व्याख्यान और घटनाये जैसे केप्लर, टाइको ब्राहे और गैलीलियो जैसे विभिन्न प्रख्यात खगोलविदों की सौ साल पुरानी जानकारी प्राप्त की जा सकती है । इसकी अति आधुनिक वेधशाला की तरह सेलेक्टरों सी -14 टेलीस्कोप ST6 सीसीडी कैमरा जैसे इक्के सीरेस द्वारा समर्थित सबसे अधिक परिष्कृत उपकरणों में शामिल हैं और फाइलर बढ़ाया है।

इसका क्या महत्व है और इसकी उपलब्धियां क्या है

तारामंडल विभिन्न ने खगोलीय खगोल विज्ञान के कई पहलुओं और उसके सम्बंधित अध्ययन के विभिन्न अन्य क्षेत्रों से जुड़े परियोजनाओं को पेश करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इसकी सबसे उल्लेखनीय परियोजनाओं में से कुछ है जैसे खगोल विज्ञान, खगोलीय यांत्रिकी का भी इतिहास बताया गया है ।  खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष के दृश्य। खगोल विज्ञानं पर एक मुक्त पाठ्यक्रम तारामंडल के प्रमुख आकर्षणों में से एक है । खगोलीय विज्ञानं पर 1999 में या 1993 में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स चलाया गया था । बिट्स पिलानी में खगोल विज्ञान और तारामंडल विज्ञान में एम फील शुरू किया गया था । 

तारामंडल भी डिजाइन और विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला भी ऑटोमेशन सिस्टम विशेष प्रभाव और दृश्यों तारामंडल शो को बढ़ाने के लिए परिणाम की स्थापना का श्रेय जाता है।

इसमें ज्योतिष विषय पर जानकारी मिलती है

तारामंडल भी खगोल विज्ञान से संबंधित लेख पर एक वैज्ञानिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है, पत्रिका, सांसद बिड़ला सभागार के जर्नल में नाम, कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों के अनुसंधान आधारित लेख प्रकाशित करती है। इसके आलावा तारामंडल भी समय-समय पर ज्योतिष पर विभिन्न पुस्तके प्रकाशित करता है ।

एयरपोर्ट से कैसे पहुँचे

टैक्सी या ऑटो से

हवाई अड्डे से दूरी जवाहर लाल नेहरू मार्ग (जेएलएन मार्ग के माध्यम से) के माध्यम से 11.9 किलोमीटर दूर है।

गोविन्द देवी जी मंदिर के लिए टैक्सी या ऑटो से 30 या 35 मिनिट लगते है ।

एक तरफ के लिए लगभग ऑटो किराया 100- 150 भारतीय रूपये

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

बीएस गोविन्द देवी जी मंदिर के लिए मिल जायेगी ।

आप ऑटो ले तो ऑटो से जवाहर सर्किल उसके बाद जवाहर सर्किल से आप जोशी मार्ग की और बस एसी -2 मिल जायेगी यह वहाँ 500 मीटर की दूरी के बाद चौपड़ पर छोड़ देगी वहाँ से पैदल 15 मिंट की दूरी पर मंदिर है ।

आप को एयरपोर्ट से अधिक से अधिक एक घण्टा लगेगा ।

+91 141 223 3509 - टिकट और जानकारी के लिए

रेलवे स्टेशन से

टैक्सी या ऑटो के माध्यम से

रेलवे स्टेशन से दूरी (स्टेशन रोड के माध्यम से) 4.2 किमी दूर है
टैक्सी या ऑटो गोविन्द देवी जी मंदिर 15 - 20 में पहुचा देगा
ऑटो का एक तरफ का किराया 80 - 110 भारतीय रुपया
टैक्सी का एक तरफ का किराया 110 - 130 भारतीय रुपया

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

बा सेवा गोविन्द देवी जी मंदिर के लिए उपलब्ध है ।

आप स्टेशन सर्किल तक पहुच जाओ फिर स्टेशन सर्किल से आप को मिनी बस गलता गेट ले जायेगी फिर वहाँ से 450 मीटर की दूरी पर त्रिपोलिया बाजार में आप को छोड़ देगी वहाँ से 15 मिनिट पैदल चलने की दूरी है ।

आप को 20 से 25 मिनिट का समय लगेगा ।

पार्किंग सूचना

उपलब्ध पार्किंग

20 बाइक या कार प्रति 30 भारतीय रुपये

संपर्क जानकारी - 0141-2619413

 

 


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