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हवा महल: जयपुर का ट्रेड मार्क


इस महल को 1799 में उल्टे छत्ते संरचना के आकार जैसा बनाया गया था। यह महल मुख्य रूप से शाही महिलाओ के लिए बनाया गया था जो की वो महल से ही सड़क पर आने जाने वाले लोगो को देख सके और हलचल का आनंद ले सकें। इस महल की वास्तु कला का निर्माण ही शाही महिलायो को जनता की चकाचौंध से दूर रखने के लिए किया गया था ताकि वो महल से सड़क का सारा दृष्टिकोण देख सके। इस महल की खिड़किया डिजाइनर जाली जैसी है जिनसे आप सड़क के द्रश्य ही नही पक्षियों की आँखों को भी देख सकते हो। लेकिन इस महल को बनाने का मुख्य कारण तो शाही महिलाओ द्वारा सड़क के ऊपर गए बिना ही वहां के सारे द्र्श्यो को देखना था । 

इसे किसने बनाया ?

इस महल के निर्माण का श्रेय कच्छवाहा राजपूत कबीले के सवाई प्रताप सिह को जाता है। उस समय के प्रमुख आर्किटेक्ट लाल चंद उस्ताद ने अपनी कलात्मक कौशल और स्थापत्य उत्कृष्टता का सबसे अच्छा इस्तेमाल किया उन्होंने अपनी वैचारिकता और बुद्धिमता से इस महल का निर्माण किया था। 

महल का कार्यात्मक उपयोग क्या था?

इस महल में 953 खिड़कियां थी जहां से रानियां सड़क के द्र्श्यो का आनंद ले सकती थी उनको वहां से देखने की अनुमति थी। तत्कालीन राजपूतों की परंपरा थी कि जनता राजकुमारियो और रानियों को नही देख सकती थी उनको स्वतन्त्र धूमने की अनुमति नही थी शाही महिलाये स्थानीय जनता से आपस में नही मिल सकती थी उनको ये अनुमति नही दी जाती थी। इस एकांत जीवन के कारण वो इस खूबसूरत जयपुर शहर को नही देख पाती थी इसलिए इस महल का निर्माण करवाया गया था ताकि वो आम जनता को देख सके। शाही महिलाये बिना सड़क पर गए ही वो वहां की जनता के बारे में अपने विचार प्रकट कर सके। महल में 953 जालीदार खिड़किया थी जो महल को ठंडा रखती थी खिड़कियों से हवा आती जाती रहती थी तो वहां खुला वातावरण महसूस होता था।

हवामहल के विशिष्ट आकार के पीछे कारण क्या है?

इसकी कलात्मक डिजाइन के लिए एक से अधिक कारण है ये पैलेस पिरामिड आकार में बनाया गया है। यह महल विशेष रूप से रानियों के लिए बनाया गया था इस महल को अंदर से देखने पर ऐसे लगता था कि जैसे उलटी छत कर रखी हो यहाँ पर मधुमखियो के छत्ते लगे हुए है इन मखियों की वास्तविक शासक रानी मधुमक्खी होती है यह महल विशेष रूप से रानियों के जीवन में खुशहाली और प्रभुत्व लेन के लिए बनवाया गया था। यह इमारत एक मुकुट की तरह लगती है यह महाराजा के प्रिय देवता गोविंददेवजी के ताज की तरह बनाया गया था।

आप इस महल के बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना चाहेगे ?

  • इस महल का गुलाबी रंग और डिजाइन इसकी सुंदरता को प्रस्तुत करती है।
  • इस महल की 5 कहानियां है जा आप सामने वाले दरवाजे से प्रवेश करेगे तो आप को एक बड़ा सा आश्चर्यजनक आँगन दिखाई देगा आप अपने आप को चारो तरफ से देख पाएंगे जिसके तीन ओर दो-मंजिला इमारतें हैं और पूर्व की और भव्य हवा महल स्थित है। इस आँगन में एक पुरातात्विक संग्रहालय भी है।
  • अपने उत्कृष्ट वास्तुकला तकनीकों का प्रयोग लालचंद उस्ताद ने इस का निर्माण किया यह महल हवा का मुक्त प्रवाह होता है इसलिए ये हवा महल है। यह सही  लोगो द्वारा गर्मी की उदासी को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। 
  • हवा महल बिना किसी आधार के बना यह महल विश्व का सबसे ऊँचा महल है।
  • हवामहल का निर्माण धुमावदार है और थोड़ा झुका हुआ है। आप अपने सबसे अच्छे ज्यामितीय कौशल का उपयोग करेंगे, तो आप वास्तव में गौर करेगे कि यह इमारत 87 डिग्री के कोण पर बनी है । 
  • इस इमारत की 3 मंजिलो में सीढ़िया नही है वहाँ पर एक रेप का उपयोग किया गया है। महल के अंदरूनी हिस्से बिल्कुल सादे है।
  • महल में धूमने का सबसे अच्छा दिन गुरुवार और शनिवार है इस दिन महल का डोरा करने की सलाह दी जाती है वहां पर एक राग संग्रहालय है जहां पर आप अमीरो के अवशेष लधु चित्र और औपचारिक कवच देखने को मिलते है जो अतीत की एक झलक दिखाते है और साथ ही आगंतुकों का स्वागत करता है।
  • आप इसकी सबसे ऊपर वाली मंजिल पर पहुँच कर सिटी पैलेस और जंतर-मंतर के विहंगम दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

एयरपोर्ट से पहुँचने के लिए कैसे करें

जेएलएन मार्ग से हवाई अड्डे 11.9 किमी की दूरी पर है।

कार या ओटो से हवामहल पहुँचने के लिये  30 से 35 मिनट लगते है

एक तरफ का ओटो का किराया 110 - 160 भारतीय रुपया ।

एक तरफ का टैक्सी का किराया 130 - 190 भारतीय रुपया ।

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

बस सेवा हवा महल के लिए उपलब्ध है। आप ओटो से जवाहर सर्किल तक पहुँचते है जवाहर सर्किल से आप जोशी मार्ग की और बस एसी -2 में जा सकते है यह बस 130 मीटर के बाद बड़ी चौपड़ पर छोड़ देगी (पैदल २ मिनट हवामहल की दुरी)

यह अधिक से अधिक 1 घंटा लगेगा

+91 141 223 3509 - टिकट और जानकारी के लिए

रेलवे स्टेशन से टैक्सी या ऑटो के माध्यम से

रेलवे स्टेशन से दूरी (स्टेशन रोड के माध्यम से) 4.2 किमी दूर है।

टैक्सी या ओटो में 15 -20 मिनट लगेगी हवा महल पहुचने के लिए ।

एक तरफ के लिए ओटो का किराया 70 - 100 भारतीय रुपया ।

एक तरफ के लिए टैक्सी का किराया 100 - 120 भारतीय रुपया ।

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

बस सेवा हवा महल के लिए उपलब्ध है।

आप स्टेशन सर्किल से स्टेशन के सर्किल तक पहुँच सकते हैं, उसके बाद आप गलता फाटक की ओर जाने वाली मिनी बस  से वहां से 450 मीटर की दुरी पर त्रिपोलिया बाजार में आप को छोड़ देगी वहां से पैदल 8 मिनट की दुरी पर है। 

यहां 18 - 20 मिनट का समय लगेगा।

पार्किंग सूचना

उपलब्ध पार्किंग

किराया  - 20 बाइक या कार प्रति 30 भारतीय रुपये

संपर्क जानकारी - 0141 261 8862

 


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