MENU X
अम्बर किले: सौंदर्य और शक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण


इसका निर्माण कई सदियो पहले हुआ था । आमेर किला जयपुर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है । यह बहुत बड़े पैमाने पर बनाया गया है. इसमें राजपूत राजाओ की शाही जीवन शैली को दर्शाया गया है । किले को मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर से बनाया  गया है ।  इसमें विभिन्न खूबसूरत महल और मंदिर  है

किले को चार वर्गों में बांटा गया है

आमेर किले का मुख्य प्रवेश द्वार

सूरज पोल महल का मुख्य प्रवेश द्वार जलेब चोक पर खुलता है । यह विजय परेड के विजयी सेनिको द्वारा इस्तेमाल किया जाता है । परेड शाही सेनिको द्वारा की जाती है लेकिन शाही महिलाओ को परेड में आने सार्वजनिक प्रदर्शन करने की अनुमति नही है । राजा और रानी के लिए ऊपरी मंजिल पर एक निजी कक्ष बनाया गया है । इन निजी कक्षो से शाही महिलाओ को देखा जा सकता है । शाही महिलाओ को परेड देखने के लिए जाली की दीवार बना दी गई  है।

इस स्थान और आँगनों में धूमने के लिये क्या करे ?

दीवाने-ए-आम

इस विशाल आँगन का इस्तेमाल राजा द्वारा जनता की चिंताओं को सुनने के लिए किया जाता था । राजा एक केंद्रीय मंच पर बैठ जाते थे और पूरी जनता की फरियाद सुनते थे । यहां पर 27 स्तम्भ है, ये स्तम्भ हाथी के आकर के बड़े बड़े है ।

दीवान-ए-खास

दीवान-ए-खास एक बैठक की तरह बनाया गया है । इसमें शाही मेहमानों को रखा जाता है और यहाँ पर मुगल मंत्रियो अभिजात वर्ग के लोगो और शाही प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के रूप में काम आता है । इसकी वास्तुकला आर्किटेक्चर के मुगल स्कुल को प्रभावित करती है और इसकी नाजुक पच्चीकारी का काम बहुत ही अलंकृत है । इसके अंदर कलात्मक जटिल डिजाइन सूंदर रूपकानो को भूतपूर्व कारीगरों के द्वारा बनाया गया है ।

गणेश पोल

इसकी बड़े पैमाने पर अलंकृत 3 स्तरीय संरचना मीरा राजा जय सिंह के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। सुहाग मंदिर नामक एक इमारत सिर्फ गणेश पोल में ही है, गणेश पोल की जालीदार खिड़किया है जब शाही कार्य बाहर हो रहे हो तो उन कार्यो को महिलाये खिड़कियों से देख सकती है इस लिए ही इसको बनाया गया था ।

सिला देवी मंदिर

जलेब चौक की सीढ़िया सीधी सिला देवी के मंदिर तक ले जाती है । यह महाराजा मान सिह द्वारा बंगाल के महाराजा जेस्सोर सास के साथ लड़ाई में उनकी जीत पर बनाया गया था । यहाँ मंदिर में कई महाराजाओ द्वारा पूजा की जाती थी । वहाँ एक किंवदंती मंदिर से जुड़ी है। यह कहा जाता हे कि जब महाराजा मान सिह बंगाल के महाराजा जस्सोर सिंह के साथ लड़ाई के लिए जा रहे थे तो उन्होंने देवी माँ से प्रार्थना की थी । देवी माँ उनके सपने में आयी और नदी के ऊपर अपनी छवि को खोजने के निर्देश दिये तब महाराजा ने वहाँ पर रोज पूजा करना सुरु किया । सन 1604 में लड़ाई जितने के बाद राजस्थान में आकर निर्देश दिया था । वहाँ पर खुदाई की गई तो वहाँ पर एक पत्थर निकला था वो सिला के जैसा था तब उस मंदिर का नाम सिला देवी मंदिर रखा गया था ।

चौथा आंगन

यह स्थान केवल महिलाओ के लिए था यहाँ पर राजा के आलावा कोई अन्य पुरुष प्रवेश नही कर सकता था यहाँ पर किसी को आने जाने की अनुमति नही थी । यहाँ पर राजाओ की पत्निया और उनकी माताए और राजमाता और सभी परिचित महिलाये ही यहाँ पर प्रवेश कर सकती थी और इसका इस्तेमाल कर सकती थी । आँगन में कई कमरे है और सभी कमरे अलग अलग रानियों के है यह किसी आम के लिए नही खोले जा सकते है ।  

तीसरा आंगन

गणेश पोल से तीसरे आँगन की 2 सूंदर समान इमारते जो रहने के लिए बनाई गई थी वो वहाँ से दिखाई देती है । इन इमारतों को एक मुगल शैली के बगीचे से विभाजित किया गया है ।

जब इमारतों को बाये तरफ से सजाया जाता हे तो जय मंदिर के पैनल नजर आते है ।

शीश महल, अम्‍बेर का ही एक हिस्सा है जो दर्पण हॉल के नाम से लोकप्रिय है। यह हॉल, जय मंदिर का एक हिस्सा है जो बेहद खूबसूरती से दर्पणों से सजाया गया है। छत और दीवारों पर लगे शीशे के टुकडे, प्रकाश पड़ने पर प्रतिबिंबित होते है और चमक पूरे हॉल में फैल जाती है। जयपुर के राजा, राजा जय सिंह ने इस हॉल का निर्माण अपने विशेष मेहमानों के लिए करवाया  था, हॉल को 1623 ई. में बनवाया गया था। हॉल में लगे हुए शीशों को बेल्जियम से आयात किया गया था ।उन मास्टर कारीगरों की कलात्मक उत्कृष्टता बहुत ही सूंदर थी उनकी इस कला के सामने हमारा सिर झुकता है । ये मंदिर कलात्मक महारत का उत्कृष्ट उदाहरण है । 70 के दशक का सबसे अच्छा ये कलात्मक निपुणता का उदाहरण है सरकार का ध्यान भी इस और गया था । इसे बाद में बहाल किया गया और पुनर्निर्मित किया गया था । अब इस तरह के कारीगर बहुत ही कम देखने को मिलते है । लेकिन हम इस तरह के कलाकारों को ढूढ सकते है और इस तरह का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते है ।

सुख निवास

सुख निवास इमारत जय मंदिर के सामने है इसके चंदन के खूबसूरत दरवाजे है उनके ऊपर सगमरमर का जटिल जड़ाई का काम किया हुआ है खूबसूरत डिजाइनों से सजाया गया है यहाँ पर मेहमानों का स्वागत किया जाता है। यहाँ पर डिजाइन की एक अलग ही विशिष्ट शैली प्रस्तुत की गई है ।

यह भवन गर्मियों में राजा और रानी के निवास स्थान के रूप में इस्तमाल किया जाता था । गर्मियों में यह बहुत ठंडा रहता है यह प्रमुख तकनीकों और निरीक्षण में बनाई गई है यहाँ पर अच्छी नल और जल की व्यवस्था है। यहां पर उच्च तापमान में भी ठंडी हवा की आपूर्ति होती है । इस महल को ऐसी डिजाइन से बनाया गया है कि यहाँ पर हमेशा ठंडक ही निहित रहती है ।

यहाँ पर एक अलग ही "सौंदर्य जादू" और "जादू फूल" है यहाँ पर आप कितनी बार भी देखो एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत होता है और अलग ही पहलू को दर्शाता है । यहाँ पर फूलों पर रंग बिरंगी तितलियां मंडराती रहती है। लेकिन पैनल के अंदर एक अलग ही भाग छिपा हुआ है जिसमे आप अलग-अलग आकर की चीजे देख सकते है जैसे - एक कमल, मछली की पूंछ, और हाथी ट्रंक, और हूडेड कोबरा, मक्का, शेर की पूंछ और बिच्छू की सिल।

इस किले को कई दशको में पूरा किया गया था यह एक वास्तुकला की स्कुल है यहाँ पर वास्तुकला की विभिन्न समकालीन प्रवर्तिया के दौरान विशिस्ट इमारतों का निर्माण किया गया था और इसको प्रतिबिंबित भी किया जा सकता है। आंगन के दक्षिण में किले का सबसे पुराना हिस्सा स्थित है।इस महल को पूरा करने में कम से कम 20 साल लग गए थे । 

बगीचा

यह उद्यान मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा निर्मित किया गया था इस उद्यान से प्रकृति के सबसे अच्छे दृश्यों को दिखाने के लिए अच्छी तरह से बनाया गया है । यह मुगल काल के दौरान बनाया गया था। यह मुगल उद्यान एक षट्कोणीय डिजाइन में चाहर बाग के बाद उस नमूने से बनाया गया है । यहाँ का सबसे प्रमुख दृश्य सितारे के आकर का पुल बनाया गया है । और इसके केंद्र में एक फव्वारा है । सुख निवास और नहरो के माध्यम से बगीचे के पानी की आपूर्ति को पूरा किया जाता है । बगीचे में पानी की आपूर्ति चीनी खाना, झरना और जय मंदिर की छत से होने वाले चैनल ही पानी के प्रमुख स्त्रोत है ।

महल तक पहुचने के लिए पश्चिम में एक तिरपोलिया गेट के माध्यम से प्रवेश किया जाता है । यह तीन उद्घाटन के लिए है :  जलेब चौक, मान सिंह पैलेस और जनाना डोरही ।

सिंह द्वार

महल के परिसर में निजी तिमाहियों पर सिंह द्वार के माध्यम से ही पहुचा जा सकता है । मूल भाषा में सिंह को शेर कहते है । इस नाम का महत्व एक निजी प्रविष्टि के रूप में इसका महत्व ताकत और शोहरत का प्रतिक है ।

इसको अति सूंदर भीति चित्रो से सजाया गया है इसके दरवाजे सवाई जय सिंह के शासन काल में सन (1699-1743) के दौरान बनाये गए थे । किले में कोई भी दुश्मन आसानी से घुसपैठ नही कर सकता था इसलिए किले के दरवाजो की डिजाइन ऐसी बनाई गई थी ।

एयरपोर्ट से पहुँचने के लिए कैसे करें

टैक्सी या ऑटो के माध्यम से

हवाई अड्डे से दूरी (जेएलएन मार्ग के माध्यम से) 23 किमी दूर है।

टेक्सी या ओटो से 60 या 70 मिनट का का समय लगेगा ।

एक तरफ के लिए लगभग ओटो से 300 से 320 भारतीय रूपये लगेंगे ।

एक तरफ के लिए लगभग टेक्सी से 300 से 350 भारतीय रूपये लगेंगे ।

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

आम किले के लिए बस सेवा भी उपलब्ध है ।

आप ओटो से जवाहर सर्किल तक पहुच सकते है फिर जवाहर सर्किल से आप को बस ऐसी - 1 कूकस की और ले जाएगी ये 190 मीटर दूर आप को आमेर पैलेस छोड़ देगी । इससे उतरने के बाद आप को 2 मिनट पैदल की दुरी पर आमेर है ।

आप को अधिक से अधिक 80-90 मिनट का समय लग सकता है । 

टिकट और जानकारी के लिए संपर्क करें: +91 141 223 3509

रेलवे स्टेशन से टैक्सी या ऑटो

रेलवे स्टेशन से दूरी टैक्सी या ऑटो से (आमेर रोड के माध्यम से) 12.6 किलोमीटर है।

टेक्सी या ओटो से लगभग 40 से 45 मिनट का समय लगेगा आमेर तक पहुचने के लिए ।

एक तरफ के लिए टेक्सी या ओटो का किराया 100 - 150 रूपये लगते है ।

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

वहां पर जाने के लिए कोई भी सीधी बस सेवा उपलब्ध नही है ।

अगर आप सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से जाना चाहते है ।

रेलवे स्टेशन सर्किल से स्टेशन सर्किल तक आना है फिर वहां से मिनी बस ले, ये बस आप को बड़ी चोपड़ छोड़ देगी

बड़ी चोपड़ से आप आमेर की तरफ जाने वाली बस ऐसी - 5 ले ।

यह आमेर पैलेस पर आप को छोड़ देगी ।

आप को वहां पहुँचने में 75 - 85 मिनट का समय लगेगा। 

पार्किंग सूचना

उपलब्ध पार्किंग

प्रभार - बाइक या कार प्रति 20-30 भारतीय रुपया

संपर्क जानकारी - 0141-2530293

 


You May Also Like

Heavy rainfall is taking place in the state of Rajasthan and causing mayhem in numerous towns and cities of the state.

‘Two may talk together under the same roof for many years, yet never really meet; and two others at their first speech are old friends.’

Pro Kabaddi League Season 4 is all set to begin on today on June 25 in Mumbai.

This studio by Cartist will provide a platform to all artists, regardless of the medium they work on.

As is commonly known as in Hindi, Jal Hai Toh Kal Hai, something we have grown up reading since a very small age.