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जयपुर की संस्कृति और लोग


जयपुर शहर के लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है । यहाँ तक कि 21वी सदी में भी जयपुर संस्कृति में एक ही पारंपरिक स्वाद देखने को मिलता है। यहाँ रहने वाले लोग सरल स्नेही गर्म और विनम्र है । शहर का माहौल राजस्थान के गौरवशाली अतीत, रॉयल्टी, शिष्टता, त्योहारों और रगों के अनुसार बहुत ही अच्छा उदाहरण है । जयपुर महानगर आधुनिकता की और बढ़ रहा है पर इसकी सांस्कृतिक जड़े बहुत मजबूत है ।

लोग

जयपुर के लोग ज्यादातर अछे होते है । जयपुर के लोग कितनी भी कठीन परिस्थिति उपस्थित हो अंदर से शांत और हंसमुख रहते है । ये लोग अपनी प्यारी मुस्कान और अपने आतिथ्य से अपनी और आकर्शित करते है । यहाँ के लोग हमेशा जरूरत के समय मिल जाते है । यहाँ के लोग हरियाली और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक है तभी तो यहाँ पर बहुत सारे उद्यान है । यहाँ के लोग बड़े अच्छे तरिके से अपना जीवन यापन करते है ।

कपड़े

people of Rajasthan

जयपुर के पुरुषों पगड़ी पहनते हैं, जबकि महिलाओं को घाघरा-चोली पहनती हैं। यहाँ के  लोगों को लाल, पीले, हरे और नारंगी रंग में चमकदार, चमकीले रंग पहनना पसंद है । ज्यादातर महिलाओं को सोना, चांदी जरी या गोटा में कढ़ाईकरी हुई चमचमाती पोशाक पहनना अच्छा लगता है । नक्काशीदार चांदी के आभूषण और कुंदन और मीना ज्वैलरी काफी लोकप्रिय हैं। लहरिया , बंधेज और रंगबिरंगे , जरी और जरदोजी के कपड़े शहर की विशेषता है ।

भाषा

जयपुर के लोग मुख्य रूप से राजस्थानी लहजे में हिंदी बोलते हैं। यहाँ की हिंदी में मारवाड़ी लहजा आता है । मारवाड़ी भाषा भी शहर में प्रचलित है। अंग्रेजी व्यापक रूप से सरकारी मामलों के लिए और स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों पर प्रयोग किया जाता है।

भोजन और स्थानीय व्यंजन

जयपुर में आप राजस्थानी थाली से लेकर  उत्तर-भारतीय व्यंजन, दक्षिण-भारतीय डोसा और इडली-सांभर से लेकर सभी प्रकार के व्यंजन मिलते है । यहाँ के लोकल व्यंजनों में ही मंगोड़ी , दाल बाटी चूरमा, मिस्सी रोटी, पापड़, छाछ और घेवर, फीनी, सोहन हलवा, गजक आदि चीजे प्रसिद्ध है । राजस्थानी भोजन घी और मक्खन डाल कर ही बनाया जाता है । यहाँ पर सड़क पर छोटे खाने के स्टॉल लगे हुए होते है उनका खाना भी बहुत अच्छा मिलता है । रावत की प्याज की कचौरी जयपुर के लोगो के लिए सुबह का लोकप्रिय नाश्ता है । जयपुर के लोगे को गोलगप्पे बहुत पसंद  है यहाँ पर हर नुक्क्ड़ पर गोलगप्पे का ठेला मिल जायेगा ।

धर्म और आध्यात्मिकता

जयपुर में ज्यादतर हिन्दू धर्म के लोग रहते है । अन्य धर्मों में यहां जैन धर्म, इस्लाम, सिख और ईसाई धर्म भी शामिल हैं। जयपुर शहर खूबसूरत मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है । जयपुर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है ।

त्यौहार

जयपुर में मेले भरते हे और बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते है । ये उत्सव इस शहर की जीवंत संस्कृति का सबसे अच्छे पक्ष को सामने लाना है। यहाँ पर सक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है जिसमे पंतग उड़ाई जाती है और गणगौर महोत्सव, तीज त्यौहार,  शीतला माता मेला, पौष बड़े, जयपुर साहित्य महोत्सव और हाथी मेला आदि त्यौहार मनाए जाते है । इनके अलावा, जयपुर भी रोमांचक वार्षिक घटनाओं और जयपुर साहित्य महोत्सव और सजावट इंडिया शो अदि कई कार्यकर्मो का आयोजन किया जाता है ।

लोकनृत्य और संगीत

नृत्य और संगीत के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते है। राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य 'घूमर' है। नर्तकियों उनके विशाल घाघरे का दिखावा करते हुए राजस्थानी लोक गीतों की धुन पर नाचती है। कई बार वो एक बर्तन पर नाचती है और कई बार काँच के गिलास पर नाचती है सर पर मटकिया रख कर भी नाचती है। सारंगी, तानपुरा, एकतारा, मोरचंग , नाद और झालर ये  कुछ उपकरणों है जिनको जब लोकनृत्य प्रस्तुत किया जाता है जब है और साथ में लोक गीत गाते भी है ।

 

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